नीमच। श्रीमती सोनल चौरसिया, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, नीमच द्वारा फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले आरोपी मुफद्दल पिता फखरूद्दीन सादड़ीवाला, उम्र-52 वर्ष, निवासी-स्कीम नंबर 36, बोहरा कॉलोनी, जिला नीमच को धारा 467, 419, 420, 468, 471 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत दोषी पाते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं कुल 6,000रू. जुर्माने से दण्डित किया।

श्री चंचल बाहेती, लोक अभियोजक द्वारा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि फरियादी काईद जोहर इज्जी द्वारा वर्ष 2010 में पासपोर्ट बनावाया गया था, जिसको रिन्यू कराने वह वर्ष 2020 में पासपोर्ट कार्यालय भोपाल गये तो वहां पता चला की उसकी पासपोर्ट कुवैत से काईद जोहर के नाम से रिन्यू हो चुकि हें तथा पासपोर्ट पर फोटो देखने पर वह आरोपी मुफद्दल की फोटो थी। इस संबंध में पासपोर्ट कार्यालय भोपाल द्वारा पुलिस अधीक्षक नीमच को जाँच हेतु पत्र भेजे जाने पर थाना नीमच केंट प्रधान आरक्षक राजेश शर्मा द्वारा जाँच करके जाँच रिपोर्ट प्रदान की थी, जिस पर से आरोपी मुफद्दल सादड़ीवाला के विरूद्ध थाना नीमच केंट में अपराध क्रमांक 430/21, धारा 467, 419, 420, 468, 471 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबद्ध की गई। पुलिस थाना नीमच केंट के एसआई सुमित मिश्रा द्वारा अनुसंधान किया गया। संपूर्ण जाँच एवं अनुसंधान से यह तथ्य प्रकाश में आया की आरोपी का दुबई में पासपोर्ट जप्त हो गया था तथा वह कुवैत जाना चाहता था, इसलिए उसके द्वारा फरियादी काईद जोहर इज्जी के दस्तावेज जिसमे जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर कार्ड आदि को प्राप्त कर उसमें उसका फोटो लगाकर दस्तावेज तैयार करते फर्जी पासपोर्ट बनावाया गया था। विवेचना के दौरान सभी फर्जी दस्तावेज को जप्त कर व आरोपी को गिरफ्तार करते हुए शेष आवश्यक अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग पत्र नीमच न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

अभियोजन द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष विचारण के दौरान फरियादी, जाँचकर्ता तथा विवेचक सहित सभी आवश्यक साक्षीगण के बयान कराते हुवे आरोपी द्वारा फर्जी पासपोर्ट बनाये जाने का अपराध को संदेह से परे प्रमाणित कराते हुव आरोपी को कठोर दण्ड से दण्डित किये जाने का निवेदन किया गया। माननीय न्यायालय ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने तथा आरोपी को भविष्य के लिए सबक दिये जाने के उद्देश्य से धारा 467 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 2,000 रूपये जुर्माना, धारा 420 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत 04 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1,000 रूपये जुर्माना, धारा 468 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत 04 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1,000 रूपये जुर्माना, धारा 419 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत 01 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1,000 रूपये जुर्माना तथा धारा 471 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत 01 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1,000 रूपये जुर्माने से दण्डित किया गया। न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी श्री चंचल बाहेती, लोक अभियोजक द्वारा की गई।